अच्छी मां कैसे बनें? अच्छी मां बनने के 10 टिप्स

अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए हर मां हर प्रयास करती हैं। वह चाहती है कि वह अपने बच्चों का पालन पोषण इतने अच्छे से कर पाए जिससे उसके बच्चे को कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और उनका बच्चा हमेशा स्वस्थ बना रहे। पहली बार मां बनने का एक्सपीरियंस बच्चों के लिए बहुत नया होता है परंतु अच्छी मां कैसे बन (Acchi maa kaise bane?)जा सकता है उसके विषय में अक्सर उन्हें जानकारी नहीं होती। 

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको अच्छी मां बनने के 10 टिप्स (Acchi maa banne ke tips) )के विषय में जानकारी देंगे। यदि आप भी इस विषय में जानकारी चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को अंत तक पड़े। 

अच्छी मां बनने की आवश्यकता

एक मां अपने बच्चों का (Acchi maa ki need)पालन पोषण करने के लिए हर प्रयास करती है। परंतु एक अच्छी मां बनने की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यदि अच्छी तरीके से आप अपने बच्चों का पालन पोषण करेंगे।

 

तो आपका बच्चा जीवन में बहुत सारे परेशानियों से बच पाएगा और वह अपनी शारीरिक एवं मानसिक सभी तरीके की परेशानियां को एक अच्छी मां होने पर काम कर सकता हैं। वह अपने जीवन को इतना सरल और सुगम बना सकता है कि उसे कभी भी बहुत सारी गलत चीजों से छुटकारा मिल सकता है। 

अच्छी मां की 10 विशेषताएं

एक अच्छी मां की आवश्यकता (Acchi maa ki qualities)सिर्फ बच्चों के शारीरिक विकास के लिए ही नहीं अभी तो उसके मानसिक विकास के लिए और उसके संज्ञानात्मक विकास के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता हैं। एक अच्छी मां वह है जो बच्चे की हर छोटी बड़ी जरूरत तो का महत्वपूर्ण ढंग से ध्यान दे पाए। 

एक मां को यह मालूम होना चाहिए कि उसके बच्चे को किस मात्रा में किस चीज की आवश्यकता होती है और क्या-क्या चीज उनके बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभा सकते हैं। वैसे तो सभी मानों का अपने बच्चों को पालने का तरीका अलग-अलग होता है। 

सभी की विभिन्न शैली होती है जिसके माध्यम से वह अपने बच्चों को पालने का प्रयास करते हैं। परंतु एक अच्छी मां के अंदर क्या-क्या विशेषताएं होती हैं। उसके विषय में नीचे जानकारी प्रदान की गई है। 

1. धैर्य रखना :

 एक अच्छी मां बनने के लिए मां की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है कि उसे धैर्य रखना आना चाहिए। यह बहुत ज्यादा जरूरी है। बच्चों की बढ़ती उम्र में उनके दिमाग का विकास होता हैं। उन्हें हर चीज़ सीखने की आवश्यकता होती है और वह अपनी शारीरिक एक्टिविटीज के माध्यम से विभिन्न विभिन्न चीजों को सिखाते हैं।

 कई बार बच्चे चीजों को सिखाने में थोड़े लापरवाह भी हो जाते हैं परंतु माता को धैर्य रखना चाहिए। यदि वह आपके घर की दीवारों या फर्श पर अपनी पेंटिंग करता हैं। विभिन्न तरीके की शैतानियां देता है या किसी भी चीज की तोड़फोड़ करता है तो आपको उसे मारना पीटना या डांटना नहीं चाहिए।

 आपको धैर्य से काम लेना चाहिए और आपको यह समझना चाहिए कि इन्हीं शारीरिक एक्टिविटीज को करके बच्चा विभिन्न चीजों को अपने दिमागी विकास में जोड़ रहा हैं। और नई चीजों को सीख रहा है। 

2. प्रोत्साहित करना :

एक मां को अपने बच्चों को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। बच्चों के लिए प्रोत्साहन एक चाबी के रूप में काम करता है। यदि आप उसकी छोटी-छोटी उपलब्धि पर उसकी तारीफ करते हैं और उसे प्रोत्साहन देते हैं।

 तो बच्चों के मन में एक नई ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है और वह इस कार्य को ज्यादा अच्छे से करने का प्रयास करता हैं। इसलिए जब बच्चा अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियां ग्रहण कर रहा हो। जैसे कि उसने जब अपना पहला कदम रखा हो उसने पहली बार बोलना शुरू किया हो या रेंगना शुरू किया हो तब आप उसकी तारीफ कर सकते हैं।

 यदि आप अच्छी तरीके से बच्चे की तारीफ करते हैं तो उसके मन में खुशी जागृत होती है और वह और अच्छे से उसे कार्य को करने का प्रयास करता हैं। वैसे बचपन से ही बच्चे की यह आदत होती है कि वह छोटी-छोटी असफलताओं का पछतावा नहीं करता। 

और दोबारा प्रयास करने के लिए भी पीछे नहीं हटा यदि यही आदत बच्चों की बड़े होने तक रहती है तो बच्चा अपने जीवन में बहुत कुछ ग्रहण कर पता है। 

3. बच्चों को समझना :

हमें अपने बच्चों को समझने का प्रयास करना चाहिए। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए कि हम अपनी बातों को ही बच्चे से कहते रहे और उसकी बातों को ना सुने। यदि हम ऐसा करते हैं तो बच्चे के मन में हीन भावना जागृत हो सकती है।

 और उसे ऐसा लग सकता है कि उसकी बात को सुनने वाला और इंपॉर्टेंस देने वाला कोई भी नहीं है इसलिए बच्चा जो भी कह रहा है या जो इशारे कर रहा हैं। उसकी बात को समझने का प्रयास करना चाहिए और यदि उसकी बात सही है तो उसे पर अमल भी करना चाहिए।

 ऐसा करने से बच्चा भी अपने मन में खुश हो जाता है और यदि उसे किसी प्रकार की समस्या होती है तो उसे भी स्पष्ट कर पता है। 

4. सम्मान देना :

यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि आप जैसा व्यवहार दूसरों से कर रहे हैं। वही अपने बच्चों के साथ एक्सपेक्ट कर सकते हैं क्योंकि आपका बच्चा आपको देखकर ही बड़ा होता है और उसी से अपनी सारी चीजों को सीखना हैं।

 आपको भी अपने बच्चों से सम्मानपूर्वक बात करनी चाहिए। यदि आप अपने बच्चों से सम्मान से बात करते हैं। तो आपका बच्चा भी आपको उतना ही सम्मान देगा और बाकी सभी से प्रेम से बात करेगा और एक अच्छा नागरिक बनने का प्रयास करेगा। 

यदि बच्चे दूसरे का सम्मान करते हैं तो वह अपने जीवन में ज्यादा धैर्यवान और अच्छे रिश्ते बनाने में कामयाब होते हैं। इसलिए बच्चों को शिष्टाचार सिखाना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। 

5. हमेशा बच्चों के लिए मौजूद रहना :

यह बहुत ज्यादा जरूरी होता है कि एक मां अपने बच्चों के लिए हमेशा मौजूद रहे। वह चाहे वर्किंग वुमन हो या हाउस मेकर हो परंतु उन्हें अपने बच्चों के लिए अवश्य समय निकालना चाहिए।

 जिन स्थानों पर बच्चों को मां की आवश्यकता होती है वहां पर बच्चों की मां को उपस्थित रहना चाहिए और बच्चे को टाइम देना चाहिए। ऐसा करने से हमें बच्चों के विषय में जानने का भी मौका मिलता है और बच्चे को भी अपने मां के साथ एक अटैचमेंट फील होता है।

 जिसके कारण वह अपने मन को प्यार करना भी शुरू कर सकता हैं। एक बच्चा अपनी मां की अटेंशन पानी के लिए बहुत प्रयास करता है और मां की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को टाइम दे और उन्हें बहुत सारा प्रेम करें। 

6. विनम्र होना :

यह जरूरी है कि एक मां अपने बच्चों के प्रति विनम्र रहे। यदि कवि कवर बच्चों की गलती ना होने के बाद भी आप किसी भी मिस अंडरस्टैंडिंग की वजह से बच्चों को डांट देती हैं और उसके बाद आपको यह महसूस होता है कि आपके बच्चे की गलती नहीं थी। 

तो आपको उस विनम्रता पूर्वक माफी मांग लेनी चाहिए आपकी एक-एक व्यवहार से आपका बच्चा अपनी मां को देखकर सकता हैं। यदि वह देखता है कि आप अपनी गलती को मानकर उससे माफी मांग रही है।

 तो वह भी यही सीखेगा और जहां पर भी उसे अपनी गलती का एहसास होगा। वह तुरंत माफी मांगने के लिए तत्पर रहेगा। बच्चे क्यों विनम्र रहना और मां का विनम्र रहना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।। 

7. मैटर बन :

एक मां को अपने बच्चों के लिए मैटर के रूप में कार्य करना चाहिए। यदि एक मां को प्रतीत हो रहा है कि उसका बच्चा प्रतिभावान हैं। यह वह अपने जीवन में अपनी मां की मदद से बहुत कुछ हासिल करता हैं। तो मन को उसके भविष्य के विषय में सीखने की जिम्मेदारी होती हैं।

 मां बच्चे की पहली शिक्षिका होती है जीवन के विषय में सारी समझ मन के द्वारा ही बच्चे को मिलती हैं। बच्चे शुरुआत से ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने लगते हैं। कुछ बच्चे बहुत छोटे से ही अपनी विभिन्न कलाओं को दिखाने लगते हैं और कुछ बच्चे कुछ बड़ा होने के बाद अपनी कलाओं को प्रदर्शित करते हैं।

 हमें अपने बच्चों की मदद करनी चाहिए और उसे इस भविष्य की ओर उत्सुक करना चाहिए। जिसमें बच्चे का इंटरेस्ट है और जैसे वह ज्यादा अच्छे से कर पता है। एक बार हमें बच्चों से बात करके भी उसके फ्यूचर को डिसाइड करने में बच्चों की मदद करनी चाहिए। 

8. सुलभ होना

किसी भी रिश्ते को आसान और सुलभ बनाने के लिए बहुत जरूरी हैं। कि हम आपस में एक दूसरे से बातचीत कर पाए और अपने मन की स्थितियों को साफ-साफ एक दूसरे के सामने रख पाए। 

एक अच्छी मां वही है जो अपने बच्चों का पालन पोषण इस हिसाब से करती है कि उनका बच्चा किसी भी बात को करने में अपने मन से डर रहे या झिझक नहीं करें। बल्कि साफ-साफ अपनी मां से अपने मन की स्थिति में बात करें।

 हमें अपने घर का माहौल बिल्कुल शांतिपूर्वक बनना चाहिए। जिसमें हमें हर व्यक्ति के मन की दशा को समझने का पूरी तरीके से प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से माता और बच्चे के बीच की बॉन्डिंग बहुत ज्यादा मजबूत होती है। 

9. मजबूत बनना : 

एक मां का मजबूत बनना बहुत ज्यादा जरूरी होता हैं। मां बनने के बाद एक महिला का जीवन बिल्कुल भी बदल जाता है। उसके जीवन में एक छोटे बच्चों की एंट्री होने के बाद उसे अपनी दिनचर्या अपना समय और अपना जीवन सब कुछ बदलने की जरूरत होती हैं।

 एक छोटे बच्चों को पालने में काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जो मन के लिए बहुत ज्यादा कठिन कार्य होता हैं। इस कार्य को ठीक करने के लिए मां को मजबूत बनने की आवश्यकता हैं।

 यदि मन मजबूती के साथ अपने बच्चों को नहीं पलटी तो वह अपने बच्चों का ख्याल नहीं रख पाएगी और उसका पालन पोषण भी ठीक प्रकार से नहीं कर पाएगी। 

10. अटल रहना : 

यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि एक मां अपनी बात पर हमेशा अटल रहे। यदि उसे महसूस हो रहा है कि उसका बच्चा कुछ गलत कार्य कर रहा है तो उन्हें अपने बच्चों के प्रति सख्त रवैया अपनाने की आवश्यकता होती है। 

उन्हें अपने मन में ऐसा कभी भी नहीं सोचना चाहिए कि अपना बच्चा होने के कारण वह उन्हें एक बार छोड़ सकते हैं। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपका बच्चा धीरे-धीरे बिगड़ जाता है। शुरुआत से ही बच्चों के साथ उसकी गलत हरकतों पर सख्त रवैया अपनाना चाहिए।

 और आपका रवैया बिल्कुल अटल होना चाहिए। I जिससे बच्चों के मन में यह हमेशा रहे की कुछ भी गलत करने पर उसकी मां हमेशा उसके सामने खड़ी हैं। हम अपने बच्चों को कई तरीके से समझाने का प्रयास कर सकते हैं।

 जैसे हम कह सकते हैं कि यह कार्य करना गलत हैं। इससे बच्चों को साफ-साफ समझ में आ जाएगा और पता चल जाएगा कि वह आपको इस कार्य को करने से रोक रहे हैं। अटलता के साथ व्यवहार करने से आपको एक मां के रूप में संतुष्टि मिलती है और आपके बच्चे के परवरिश भी बहुत अच्छी तरीके से होती है। 

टॉपिक से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर

Q. अच्छी मां बनने की आवश्यकता क्यों है? 

एक अच्छी मां अपने बच्चों की हर छोटी जरूर का ख्याल रखती है और उसका अच्छा पालन पोषण करती है। 

Q. मां एक बच्चे की जीवन में क्या भूमिका निभाती है? 

मां बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है एक मन ही है जो बच्चे को पाल-पॉस्कर बड़ा करती है। 

Q. बचपन से ही बच्चे सबसे ज्यादा अटैच किसके साथ रहते हैं? 

बचपन से ही बच्चे सबसे ज्यादा अटैच अपनी मां के साथ रहते हैं। 

Q. एक अच्छी मां बनने के लिए क्या-क्या करने की आवश्यकता होती है? 

अच्छी मां बनने के लिए मन को अनुशासन में रहना प्रोत्साहित करना अटल रहना सुलभ बना मजबूत बना आदि चीजों की आवश्यकता होती है। 

निष्कर्ष :

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको अच्छी मां बनने के 10 टिप्स के विषय में जानकारी के विषय में जानकारी देने का पूरा प्रयास किया है। यदि फिर भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो आप कमेंट करके कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

हमारे आर्टिकल के द्वारा प्रदान की हुई जानकारी बिल्कुल ठोस और सटीक है ।अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आए तो आप इसे अवश्य शेयर करें । हमारा आर्टिकल पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।

Leave a Comment