बच्चों में कुपोषण के लक्षण कारण व रोकथाम के उपाय (Babies me malnutrition)

माता-पिता अपने बच्चों को बिल्कुल स्वस्थ रखना चाहते हैं। जिससे उनके बच्चे को अपने जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। वह चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ रहकर अपने जीवन की सभी कठिनाइयों को अच्छे से पार कर पाए। परंतु बहुत सारे बच्चे पोषक तत्वों की कमी के कारण कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। और उन्हें इस विषय में जानकारी नहीं होती कि वह अपने बच्चों को कुपोषण से कैसे (Babies ka malnutrition se bachav) बचा सकते हैं।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके बच्चों में कुपोषण के लक्षण, कारण व रोकथाम के (Babies ka malnutrition ke symptoms, reason, bachav) उपाय के विषय में जानकारी देंगे। यदि आप भी इस विषय में जानकारी चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

बच्चों में कुपोषण किसे कहते हैं? 

यदि बच्चों के शरीर के अंदर सही (Malnutrition kya hai? )मात्रा में पोषक तत्व की पूर्ति नहीं हो पा रही है तो बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। यह पोषक तत्व कैल्शियम, विटामिन, मिनरल्स, पोटेशियम आदी हैं। यह सारे पोषक तत्व शरीर में पूरा होना जरूरी हैं।

बच्चों में कुपोषण के लक्षण कारण व रोकथाम के उपाय (Babies me malnutrition)

 यदि यह पोषक तत्व शरीर में सही मात्रा में नहीं पाए जाते तो बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाता हैं। यदि यह पोषक तत्व शरीर में अधिकता में हो जाती है या काम हो जाते हैं। तो यह शरीर के विकास को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं। यदि बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन मौजूद नहीं है तो बच्चों का वजन और उसकी लंबाई कम होने की आशंका होती हैं।

 यदि बच्चे के शरीर के अंदर यह सारे पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में उपस्थित हो गए हैं तो उसके नुकसानदायक प्रभाव जैसे कि बच्चे का मोटापा बढ़ाना भी देखने को मिल जाता हैं। बच्चों के अंदर सभी पोषक तत्वों की पूर्ति बिल्कुल संतुलित मात्रा में होनी चाहिए।

बच्चों में कुपोषण कितने प्रकार का होता है? 

बच्चों में कुपोषण होने के (Babies ka malnutrition ke types)मुख्य पांच प्रकार देखे गए हैं। इसके विषय में नीचे जानकारी प्रदान की गई है।

1. स्टनिंग :

स्टनिंग में कैसी समस्या होती है जिसमें बच्चों की लंबाई और विकास यदि सामान्य होना चाहिए। तो वह नहीं हो पाता इसके परिणाम हमें तुरंत देखने को नहीं मिलते परंतु जैसे-जैसे बच्चे का विकास होता रहता हैं। वैसे-वैसे हमें इसके परिणाम देखने को मिल जाते हैं।

 स्टनिंग जैसे कुपोषण की शुरुआत तब होती है जब बच्चा मां के गर्भ में होता हैं। भ्रूण में यदि सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। तो बच्चा स्टनिंग का शिकार हो जाता है और उसकी लंबाई और वजन कम रह जाता है।

 यह बच्चे के अंदर लंबे समय तक से चली आ रही पोषक तत्वों की कमी को साफ-साफ जाहिर कर देता है। जब बच्चा 2 साल का हो जाता है। 2 साल का होने पर बच्चों के अंदर स्टनिंग के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लगते हैं।

2. बोस्टिंग :

बोस्टिंग नमक कुपोषण बच्चों के अंदर किसी भी तरीके की बीमारी के हो जाने की वजह से होता है। यदि बच्चा डेंगू या मलेरिया किसी भी प्रकार की बीमारी का शिकार हो गया है। तो बच्चा इस प्रकार के कुपोषण से पीड़ित हो जाता है।

 बीमारी के कारण बच्चों के शरीर में पोषक तत्व को अवशोषित करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। जिसके कारण बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है।

 बोस्टिंग के कारण बच्चों के अंदर हो रहा सामान्य विकास बाधित हो जाता है जिसके कारण बच्चों के शरीर के अंदर बहुत सारी कमियों का सामना करना पड़ता है।

3. क्वासीओरकर :

बच्चों के अंदर इस प्रकार का कुपोषण भारी प्रोटीन की कमी और ऊर्जा की कमी के कारण होता है। यदि शरीर के अंदर प्रोटीन और ऊर्जा की कमी हो जाती है। तो शरीर में मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। और हमारा शरीर बिल्कुल पतला और कमजोर देखना लगता है।

 इस प्रकार के कुपोषण के कारण शरीर में सूजन की समस्या भी जागृत हो जाती हैं। यदि आप अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा ले रहे हैं। और प्रोटीन युक्त चीजों की कमी कर रहे हैं। तो आपके शरीर में इस प्रकार का कुपोषण होना एक आम बात हो जाती है इस प्रकार की कमर्शियल में बच्चे का विकास रुक जाता है।

4. मारासमुस : 

मारासमुस भी एक प्रकार का कुपोषण का रोग होता है इस प्रकार के कुपोषण में भी शरीर के अंदर उर्जा और प्रोटीन की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है। जिसके कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

 शरीर में यह समस्या तब पैदा होती हैं। जब हमारे शरीर में कैलोरीज की पूर्ति नहीं हो पाती। कैलोरीज की पूर्ति न और पानी के कारण हमारे शरीर के अंदर टिशु और मांसपेशियों का विकास काम हो पता हैं। और हमारे अंदर इस प्रकार का कुपोषण जागृत हो जाता है।

5. माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी :

यदि बच्चे के शरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है। तब भी बच्चे को कुपोषण का शिकार होना पड़ता है माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फोलिक एसिड, जिंक, फास्फोरस आदि चीज आती हैं।

 यदि शरीर में इन सभी चीजों की पूर्ति ठीक प्रकार से नहीं हो पाती। यह संतुलित मात्रा में से शरीर को नहीं दिया जाता तब यह हमारे अंदर कुपोषण जागृत कर देता हैं। और हमारा शरीर बिल्कुल कमजोर हो जाता है। 

अपने शरीर को पोषण जैसी बीमारी से बचने के लिए हमें अपने बच्चों को सभी प्रकार का संतुलित भोजन देना चाहिए। जिससे सारे पोषक तत्व उसके शरीर को मिलते रहे।

भारत में कितने बच्चे को पोषण से पीड़ित है ? 

भारत में एक सर्वे के (Babies ka malnutrition ka percent)अनुसार जो की 2015-16 में करवाया गया था। लगभग हर जिले के अंदर 7 से लेकर 65% तक बच्चों को पोषण से पीड़ित है।

 जो की एक चिंताजनक स्थिति है यदि बच्चे का विकास ही ठीक प्रकार से नहीं होगा। तो वह अपने जीवन में कुछ भी करने मे असमर्थ होगा।

बच्चों में कुपोषण के लक्षण

यदि हम कुपोषण के लक्षणों (Babies ka malnutrition ke symptoms)को जानने में असमर्थ होंगे तो हमें यह पता नहीं लग पाएगा। कि हमारा बच्चा कुपोषण का शिकार हैं।

 इसलिए कुपोषण के लक्षणों के विषय में जानना अति आवश्यक है इसके विषय में नीचे जानकारी दी गई है।

  • त्वचा पर खुजली और जलन की समस्या।
  • हृदय का ठीक से काम न करना।
  • लटकी और बेजान त्वचा।
  • पेट से संबंधित संक्रमण।
  • सूजन की समस्या।
  • श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रमण।
  • कमजोर प्रतिरोधक क्षमता।
  • चिड़चिड़ापन।

भारत में कुपोषण के कारण व समाधान

भारत में कुपोषण की (Babies ka malnutrition ke reason)क्या-क्या कारण है। उसकी क्या-क्या समाधान हो सकते हैं उसके विषय में नीचे जानकारी दी गई है।

1. गरीबी :

भारत में कुपोषण का एक मुख्य कारण है गरीबी। गरीबी एक ऐसा दंस हैं। जिसके कारण भारत के कई सारे परिवार भूखे रह जाते हैं। पैसे की कमी के कारण भारत में कई लोगों के पास ना तो खाने के लिए भोजन है और ना ही ठीक-ठाक रहने का घर।

 गरीबों के कारण यह लोग ना तो अपने भोजन का ध्यान रख पाते हैं और ना ही साफ सफाई का। जिसके कारण इन्हें बहुत सारी बीमारियों का सामना भी करना पड़ता है। भारत की लगभग बहुत सारी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे बात करती है। उनके लिए एक वक्त का भोजन भी बहुत मुश्किल से मिलता है। जिसके कारण गरीब बच्चों को  कुपोषण का शिकार ज्यादा होते हैं।

2. लड़का और लड़की के बीच भेदभाव :

भारत में आज भी कई लोगों के दिमाग में पुरानी मानसिकता है। वह लड़की और लड़कियों को समान अधिकार नहीं देते और उनके बीच में भेदभाव के कारण बहुत सारी लड़कियां कुपोषण का शिकार हो जाते हैं।

 वह अपने लड़कों को ज्यादा अच्छा भोजन देने का प्रयास करते हैं लेकिन लड़कियों का सिर्फ पेट भरने का प्रयास करते हैं। भारत में कई सारे ऐसे लोग हैं जो लड़के लड़कियों को बराबर नहीं मानते। और उनके परिवारों में लड़कियों की स्थिति इतनी दयनी है। कि उन्हें ठीक से रहने तक का अधिकार नहीं है भेदभाव भारत में कुपोषण का एक मुख्य कारण है।

3. कम उम्र में मन बनना :

आज भी भारत में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपनी बेटियों को बेचने में विश्वास रखते हैं। वह छोटी सी उम्र में अपनी बेटियों की शादी कर देते है। छोटी-छोटी उम्र की लड़कियां मां बन जाती है। छोटी उम्र में ही मां बन जाना बच्चियों के अंदर कुपोषण का एक मुख्य कारण होता है।

 छोटी सी उम्र में मां बनने के कारण उनके अंदर पाल रहे भ्रूण का ही ना तो सही विकास हो पता है। और ना ही उसे माता का शारीरिक विकास ठीक ढंग से हो पता है जो औरतें कम उम्र में वहां बनती हैं। वह अक्सर बीमार रहती हैं।

 और उनका शरीर हमेशा कमजोर रहता हैं। उनके शरीर में कभी भी पोषक तत्व की पूर्ति नहीं हो पाती वह जिस बच्चे को जन्म देती है वह भी पूरी तरीके से स्वस्थ नहीं रहता।

4. स्तनपान का अभाव :

आज के समय में पढ़ी-लिखी हर मां अपने बच्चों को स्तनपान कराने में विश्वास रखते हैं। उन्हें यह मालूम है कि उनके स्तनपान करने से उनके बच्चे पर इसका कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है। और उनका बच्चा कितना अंदर से मजबूत होता हैं। परंतु जो मैं बिना पढ़ी लिखी है।

 और स्तनपान कराने के फायदे उन्हें पता नहीं है मैं अपने बच्चों को स्तनपान कराने में विश्वास नहीं रखती। उन्हें ऐसा लगता हैं। कि यदि वह अपने बच्चों को अपना स्तनपान नहीं करेंगे तो उनका बच्चा सर्दी से दूर रहेगा परंतु स्तनपान के अभाव के कारण आपका बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाता है। 

मां के दूध में ऐसे बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो किसी और दूध में नहीं मिलते जिसके कारण माँ को स्तनपान कराना जरूरी होता है।

5. ज्ञान की कमी :

जीन माता के अंदर ज्ञान की कमी होती है। और उन्हें साइंस के विषय में थोड़ी भी जानकारी नहीं होती उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

 यह बच्चे के अंदर एंटीबॉडीज को जागृत करने में बहुत मदद करता हैं। परंतु जिन महिलाओं को इस विषय का ज्ञान नहीं होता वह इस दूध को बेकार और गंदा समझती है। और उसको निकाल कर फेंक देती है।

 जिन महिलाओं को इस दूध की महत्वता पता होती है वह अपने बच्चों को अपना पहला दूध अवश्य पिलाती हैं। इसलिए गर्भवती महिला को इन सभी विषयों में जानकारी देना बहुत ज्यादा आवश्यक है।

6. खराब स्वच्छता के कारण कुपोषण :

स्वच्छता में कमी होने के कारण भी बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। यदि साफ सफाई से बच्चे को भोजन नहीं कराया जाता या बच्चे को गंदा पानी पिलाया जाता है। तो बच्चा जल्दी-जल्दी बीमारी का शिकार हो जाता हैं।

 यदि उसकी शरीर में बीमारियां वास करती है। तो बच्चे के अंदर पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। और वह ठीक प्रकार से पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता जिसके कारण भी बच्चा कुपोषण का शिकार होता है।

7. गंदा पर्यावरण :

बहुत सारे लोग गंदे पर्यावरण में रहते हैं जिसके कारण भी वह कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। गरीबों के कारण बहुत सारे लोग बड़े-बड़े नालों के किनारे झुकी बनाकर रहते हैं। या फिर चमड़े की और कोयले की फैक्ट्री में काम करते हैं।

 उनके आसपास का परिवेश बहुत गंदा होता हैं। वह जो सांस लेते हैं उनके अंदर सारा पॉल्यूशन चला जाता हैं। जिसके कारण उनके आंतरिक शरीर भी गंदा हो जाता हैं।

 जिस कारण उनके अंदर पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है और वह कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

बच्चों में कुपोषण की जांच कैसे करें? 

  • बच्चों के अंदर कुपोषण की जांच करने के लिए मुख्ता बच्चे का वजन और लंबाई के माध्यम से उसके कुपोषण के विषय में जांच करके पता लगा सकते हैं।
  • बच्चों की भौतिक जांच करने के द्वारा भी बच्चों के अंदर कुपोषण की स्थिति को पता लगाया जा सकता है।
  • कुछ विशेष स्थितियों में बच्चों के अंदर कुपोषण की जांच करने के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग की जाती हैं। और यह जांच की जाती है कि बच्चों के शरीर के अंदर किस प्रकार के पोषक तत्वों की कमी है।

कुपोषण का बच्चों पर क्या असर होता है? 

  • बच्चों का शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पता उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता हैं। जिसके कारण उनके सोचने समझने की क्षमता भी काम हो जाती है।
  • बच्चों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती हैं। वह जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं। और वह किसी भी प्रकार के संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
  • यदि शरीर के अंदर कुपोषण की गंभीर अवस्था हो गई है। तो उनमें परजीवी का संक्रमण का जोखिम अधिक हो जाता है।

कुपोषण से रोकथाम के उपाय

  • यदि आप बच्चे को किसी भी प्रकार से मां का दूध पिलाने में असमर्थ है। तो उसे फार्मूला मिल्क आवश्यक पिलाई बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मां का दूध होता है। इसलिए प्रयास करें कि उसे अपना ही दूध पिलाई।
  • यदि आपके बच्चे अनाज का सेवन करते हैं तो यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए। कि उन्हें सही मात्रा में विटामिन एंड प्रोटीन की पूर्ति होती रहे।
  • माता-पिता को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा सारे रूप से सक्रिय है या नहीं।

टॉपिक से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर (FAQ) 

Q. बच्चों के अंदर कुपोषण क्या है? 

यदि बच्चे का शरीर अपनी उम्र के हिसाब से डेवलप नहीं हो पा रहा है। और उसका वजन और लंबाई कम है तो बच्चे को पोषण का शिकार है।

Q. बच्चों को पोषण का शिकार क्यों होता है? 

यदि बच्चे के शरीर में पोषक तत्व की पूर्ति नहीं हो पाती तो वह कुपोषण का शिकार हो जाता है।

Q. मुख्यतः कुपोषण कितने प्रकार का होता है?

कुपोषण समानता चार प्रकार का पाया जाता है।

Q. कुपोषण को किस प्रकार कम किया जा सकता है?

यदि शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति सही होती रहे और बच्चे को मां का दूध प्राप्त हो तो कुपोषण काम हो सकता है।

निष्कर्ष :

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको बच्चों में कुपोषण के लक्षण कारण व रोकथाम के उपाय (Babies ka malnutrition se bachav)के विषय में जानकारी देने का पूरा प्रयास किया है।यदि फिर भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो आप कमेंट करके कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

हमारे आर्टिकल के द्वारा प्रदान की हुई जानकारी बिल्कुल ठोस और सटीक है ।अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आए तो आप इसे अवश्य शेयर करें । हमारा आर्टिकल पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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