शिशु को सुलाने की सही एवं सुरक्षित पोजीशन क्या है? (Baby ko sulane ki safe position) 

छोटे बच्चों का वक्त अक्सर सोने में बीतता है। वह दिन की ज्यादा समय तक सोते रहते हैं इसलिए यह जरूरी है कि उनके सोने की सही अवस्था के विषय में ध्यान दिया जाए क्योंकि यदि बच्चे गलत अवस्था में सोते हैं तो यह उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए बच्चे की सोने की अवस्था सही रखें परंतु बच्चे की सोने की सही अवस्था क्या है (Baby sleeping ki safe position) इसके विषय में हमें जानकारी पाना आवश्यक है।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको शिशु को सुलाने की सही एवं सुरक्षित अवस्था (Baby sleeping ka sahi tarika) के विषय में बताएंगे। यदि आप भी इस विषय में जानकारी चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

शिशु को सुरक्षित पोजीशन में सुलाना क्यों जरूरी है? 

शिशु को सुरक्षित पोजीशन में सुनाना (Baby sleeping me safe position ki need) इसलिए जरूरी है क्योंकि उन्हें अचानक मौत से बचाया जा सके। यदि शिशु को गलत पोजीशन में सुलाया जाता है तो उन्हें सांस लेने में समस्या हो सकती है। 

शिशु को सुलाने की सही एवं सुरक्षित पोजीशन क्या है (Baby ko sulane ki safe position) 

बच्चे को सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) का खतरा हो सकता है। इसका मतलब है कि बच्चे की अचानक मृत्यु हो सकती है इसलिए बच्चे को सुरक्षित पोजीशन में सुलाना बहुत आवश्यक है। जिससे वह अच्छे से सांस ले सके और आराम से सो सकें।

शिशु के सोने की सुरक्षित और असुरक्षित अवस्थाएं | Baby Ko Kis Position Me Sulana Chahiye

1. पेट के बल सुलाना :

कभी भी आपको शिशु को पेट के बल नहीं सुलाना चाहिए। यह पोजीशन बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती। पेट के बल सुलाने से बच्चे को सांस लेने में समस्या होती है।इसके कारण बच्चे की अचानक मृत्यु होने का डर बना रहता है इसलिए बच्चे को पेट के बल ना सुलाये ।

यदि आपके बच्चे को ऊपर स्वसन तंत्र संबंधित समस्या है तो आप अपने बच्चे को पेट के बल सुला सकते हैं। ऐसी समस्या वाले बच्चों को डॉक्टर पेट के बल सुलाने की सलाह देते हैं इससे बच्चे को सांस लेने में आराम मिलता है।

 इसके अलावा यदि गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स (पेट के एसिड का वापस ऊपर आना) की समस्या में डॉक्टर बच्चे को पेट के बल सुलाने की सलाह दे सकते है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि डॉक्टर के दिए हुए निर्देशों के अनुसार ही बच्चे को सुलाना चाहिए।

2.पीठ के बल सोना

बच्चे को सुलाने की सही अवस्था पीठ के बल है। पीठ के बल सुलाने से बच्चे का स्वसन तंत्र बिल्कुल खुला रहता है और उसे सांस लेने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती। पीठ के बल सोने से बच्चे की सड़न इन्फेंट डेथ का जोखिम भी कम रहता है।

 जिन बच्चों का जन्म समय से हुआ है एवं वह स्वस्थ हैं तो आप अपने बच्चे को पीठ के वल सुला सकते हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ एंड हुमन डेवलपमेंट के अनुसार यह बताया गया है कि बच्चे को पीट के वल सोना सबसे सही पोजीशन माना जाता है।

एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि बच्चे को पीट केवल सुलाने से एस आई डी का जोखिम 40% तक कम हो जाता है। आप बच्चे को थोड़ी देर के लिए सुला रहे हैं या पूरी रात के लिए सुला रहे हैं हमेशा उसे पीठ के बल ही सुलाना चाहिए।

3.एक तरफ मुंह करके सोना (साइड स्लीपिंग)

साइड स्लीपिंग भी बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती। साइड स्लीपिंग में बच्चा धीरे-धीरे पेट केवल सो जाता है। जिससे उसके स्वसन तंत्र में दबाव पड़ता है और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

 इससे बच्चे में सड़क इन्फेंट डेथ की समस्या होने की संभावना रहती है। इसलिए बच्चे को पीठ के बल की सुलाना चाहिए साइड स्लीपिंग बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं है।

समय से पहले जन्मे शिशुओं के लिए सोने की सबसे अच्छी स्थिति क्या है?

समय से पहले जन्मे शिशु के सोने की सुरक्षित (premature baby ki sleeping position) अवस्था भी पीठ के बल है। समय से पहले जन्मे बच्चों में सड़न इन्फेंट डेथ की दर ज्यादा रहती है क्योंकि उनका शरीर नाजुक होता है और उनके शरीर के आंतरिक अंग भी कमजोर होते हैं।

 उनका विकास पूरी तरीके से नहीं हो पाता इसलिए ऐसे बच्चों का अधिक ध्यान रखना आवश्यक है। समय से पहले जन्मे बच्चों को कभी भी पेट के बल या साइड स्लीपिंग से ना सुलाएं। हमेशा उन्हें पीठ के बल ही सुलाना चाहिए पीठ। के बल सुलाना एक सबसे सुरक्षित अवस्था है।

स्लीपिंग प्रैक्टिस जो शिशु में अचानक मौत का कारण बन सकती है (SUDI)

शिशु की गलत स्लीपिंग पोजिशन के (Babies me sudden death ke reason) अलावा कुछ ऐसे कारण होते हैं जिनके वजह से सडन इन्फेंट डेथ की समस्या हो सकती है। इन कारणों के विषय में जानकारी पाना बहुत आवश्यक है जिसे नीचे पॉइंट के माध्यम से स्पष्ट किया गया है।

  • शिशु को मुलायम तकिए गद्दे सोफे या काउच पर सुलाना।
  • नवजात बच्चे के चेहरे को चादर से जितना जिससे उसे अचानक घुटन हो सकती है। और सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • गर्मी की दर बहुत अधिक होना।
  • गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के बाद उसके आसपास धूम्रपान करना।
  • प्रेग्नेंसी के समय मादक पदार्थों जैसे शराब का सेवन करना।

शिशु को सुरक्षित तरीके से सुलाने के 11 टिप्स

शिशु को चलाते समय कुछ जरूरी (Baby sleeping position ke tips) सावधानियों को बरतना चाहिए और उसे सुरक्षित तरीके से सुलाना चाहिए। जिसके विषय में टिप्स आपको प्रदान किए गए हैं।

फर्म बेड पर बच्चे को सुलाएं – 

माता पिता जी ने जानकारी नहीं होती वह अपने बच्चे को मुलायम गद्दे पर सुलाने का प्रयास करते हैं। परंतु ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

 बच्चे को मुलायम गद्दे पर सुलाने की वजह ठोस गद्दे  पर सुलाना चाहिए उसके आसपास या बेड पर कोई ऐसी तकिया, मुलायम चीज या चादर नहीं रखनी चाहिए। जिससे उसका चेहरा ढक जाए और उसे सांस लेने में तकलीफ हो।

ओवरहीटिंग से बचें – 

बच्चे को सोते समय हल्के कपड़े पहनाने चाहिए। गर्मियों के मौसम में बच्चे को मोटे कपड़े पहनने से सांस लेने में समस्या हो सकती है। इसलिए बच्चे को सूती वस्त्र पहनाएं जिससे वह बिल्कुल आराम महसूस करें।

पैसी फायर का उपयोग :

डॉक्टर का यह मानना है कि पैसी फायर का उपयोग करने से बच्चे की सड़न इन्फेंट डेथ की दर बहुत कम हो जाती है। इसलिए सोते समय बच्चे के मुंह में पैसे फायर अवश्य लगाना चाहिए।

 यदि बच्चा पैसी फायर मुंह से बार-बार निकाल दे रहा है तो उसे डालने के लिए आपको जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ पीडियाट्रिक्स का यह दावा है कि पैसी फायर बच्चे की सड़न इन्फेंट डेथ को रोकने में मदद करता है।

शिशु को अपने बिस्तर पर सुलाने से बचें – 

शिशु को कभी भी वयस्कों के बिस्तर पर नहीं सुलाना चाहिए। शिशु के लिए सोने का सबसे सही स्थान उसका पालने  में सुलाना चाहिए होता है। शिशु को उसी पालने में सुलाना चाहिए। यदि कोई  धूम्रपान या शराब का सेवन करता है तो बच्चे को अपने बिस्तर पर कभी ना सुलाएं। इससे बच्चे में सड़न इन्फेंट डेथ की समस्या हो सकती है।

शिशु का पालना अपने कमरे में ही रखें –

माता-पिता बच्चे को जिस बेड पर सुला रहे हैं या जिस पालने में सुला रहे हैं उसे हमेशा अपने पास रखना चाहिए। जिससे आपको आपके बच्चे की आंख मिलती रहे और आप उसका ध्यान रख पाए।

 कभी भी बच्चे के बिस्तर को अपने से अलग कमरे में नहीं रखना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस कमरे में बच्चा सो रहा है वहां पर धूम्रपान ना हो।

शिशु का सिर ना ढके –

यदि शिशु को आपने चादर या कंबल उड़ा रखा है तो यह ध्यान रखना चाहिए कि उसे आप उसके सीने तक ही ढके।  कभी भी कंबल को उसके चेहरे तक नहीं उड़ाना चाहिए।

 इससे दम घुटने की समस्या हो सकती है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि शिशु के सिर को कभी न ढके ।

शिशु को लपेटना – 

छोटे बच्चे का शरीर गोल मटोल होता है मैं जल्दी से अपने पेट के बल खिसक जाता है इसलिए बच्चे को सूति या मलमल के कपड़े में लपेट कर रखना चाहिए। जिससे वह बार-बार अपने पेट के बल ना मुड़े। 

जैसा कि हमने आपको आर्टिकल में स्पष्ट किया है कि पेट के बल सोने से बच्चे को सांस लेने में समस्या होती है। और उसकी अचानक मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए शिशु को लपेट कर रखना चाहिए परंतु इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसे ज्यादा कसकर ना लपेटे इससे उसे परेशानी हो सकती है।

ओढ़ने वाले कपड़े को सही तरीके से रखें –

बच्चे को उड़ाने वाले कपड़े को बिल्कुल सही तरीके से और उसे उड़ाना चाहिए। उड़ाने वाले कपड़े को आपको उसके सीने तक ही रखना चाहिए और उसके हाथों को कंबल के ऊपर रखना चाहिए। जिससे कंबल के खिसक कर उसके चेहरे तक ना जाए।

 यदि बच्चे का चेहरा कंबल या चादर से ढक जाता है तो सिर्फ घुटन हो सकती है और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। जिससे उसकी अचानक मृत्यु का कारण भी बन सकता है।  इसलिए उड़ने वाले कपड़े को सीने के ऊपर नहीं उड़ाना चाहिए और बार-बार चेक करते रहना चाहिए कि बच्चे का चेहरा खुला हुआ हो।

रूम टेम्परेचर को नॉर्मल ही रखें – 

बच्चे को स्वस्थ बनाए रखने के लिए यह सलाह दी जाती है कि बच्चे को ऐसे कमरे में सुलाएं जो ना ज्यादा ठंडा होना ज्यादा गर्म। बच्चे को रूम टेंपरेचर पर ही सुलाना चाहिए इससे बच्चे कम बीमार पड़ते हैं और अपने आप को सहज महसूस करते हैं।

शिशु के बेड पर किसी अन्य को ना सुलाये –

जिस बेड पर शिशु सोता है उस बेड पर किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सुलाना चाहिए क्योंकि कोई अन्य व्यक्ति अगर नींद में बच्चे के ऊपर सो जाता है या उसका हाथ बच्चे के चेहरे पर रख जाता है और उसकी नाक बंद हो जाती है।

  इससे बच्चे को सांस नहीं आती और उसकी सडन डेथ हो सकती है। इसलिए शिशु के बेड पर उसे अकेला ही चलाना चाहिए किसी भी दूसरे व्यक्ति को शिशु के बेड पर कभी न सुलाये ।

प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से बचें –

आजकल मार्केट में बहुत सारे प्रोडक्ट ऐसे आते हैं जिनमें बहुत खतरनाक केमिकल्स पाए जाते हैं। यह केमिकल बच्चे के नाजुक शरीर और उसके अंदरूनी भाग को नुकसान पहुंचाते हैं।

 इसलिए बच्चे पर इस्तेमाल होने वाले तेल या शैंपू बेबी ओरिएंटेड ही होने चाहिए। वह नेचुरल हो और यह चेक कर लेना चाहिए कि उनमें ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल न किया गया हो।

टॉपिक से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर (FAQ) 

Q. बच्चे को किस अवस्था में सुलाना सबसे सुरक्षित है? 

बच्चे को पीठ के बल सुलाना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

Q. वह कौन सी सोने की अवस्थाएं हैं जो बच्चे के लिए खतरनाक मानी जाती हैं? 

बच्चे का पेट के बल सोना या साइड स्लीपिंग करना खतरनाक माना जाता है क्योंकि इससे सांस लेने में समस्या होती है।

Q. समय से पहले जन्मे बच्चे को किस अवस्था में सुलाना चाहिए? 

समय से पहले जन्मे बच्चे को पीठ के बल सुलाना चाहिए यह सबसे सुरक्षित अवस्था है।

Q. यदि बच्चा सोते समय पेट के बाल रोल कर जाए तो क्या हो सकता है? 

पेट के बाल रोल करने से बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और उसकी डेथ भी हो सकती है।

निष्कर्ष :

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको शिशु को सुलाने की सही एवं सुरक्षित पोजीशन क्या है (Baby ko sulane ki safe position) के विषय में जानकारी देने का पूरा प्रयास किया है। यदि फिर भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो आप नीचे दिए हो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

हमारे आर्टिकल के द्वारा प्रदान की जाने वाली जानकारी बिल्कुल ठोस तथा सटीक होती है। यदि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आए तो आप इसे अवश्य शेयर करें। हमारा आर्टिकल पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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