अपने जिद्दी बच्चों को कैसे समझाएं? (Ziddi bachon ko kaise samjhaye)

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता हैं। माता-पिता यही कोशिश करते हैं कि उनके बच्चे के संस्कार बहुत अच्छी हूं। और वह अपने जीवन में बहुत कुछ अच्छा प्राप्त करें। समाज में रहने वाले सभी लोग उनके बच्चे की तारीफ करें। और वह सभी से उचित प्रकार से बर्ताव करें परंतु समाज में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो बहुत ही जिद्दी होते हैं। ऐसे जिद्दी बच्चों को कैसे ठीक किया जा सकता है (Ziddi Bachon ko kaise samjhaye)या कैसे समझाया जा सकता है उसके विषय में अक्सर पेरेंट्स को जानकारी नहीं होती।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको जिद्दी बच्चों को कैसे समझाएं (Ziddi Bachon ko kaise samjhane ke upay)उसके विषय में जानकारी देंगे। यदि आप भी इस विषय में जानकारी चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को अंत तक पड़े।

कुछ बच्चे जिद्दी क्यों होते हैं? 

अक्सर माता-पिता (Ziddi Bachon kyun hote hai?) अपने बच्चों के जिद्दीपन से परेशान रहते हैं। लाख समझाने बुझाने पर भी यदि बच्चा अपना जिद्दी पर नहीं छोड़ता तो माता-पिता को काफी सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता हैं। कुछ बच्चे बढ़ती उम्र के साथ और भी जिद्दी होने लगते हैं।

 परंतु कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो समझदार होने के साथ-साथ अपने आप को ठीक भी रखने का प्रयास करते हैं। बच्चों की जिद्दी होने का मुख्य कारण है। उसकी सारी एक समस्या या फिर भूख लगा अक्सर जब बच्चे भूखे होते हैं तो वह जिद्द कर बैठते हैं।

 बच्चों की जिद्दी होने का दूसरा कारण है उसका सामाजिक परिवेश उसको देने वाला लाड प्यार और उसकी डांट फटकार है। यह सभी कारक भी बच्चों के जिद्दी होने का मुख्य कारण मिलते हैं। कई बार बहुत सारे बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है।

 कि वह सब कुछ कर सकते हैं जिस कारण में छोटी-छोटी बात पर जीत कर बैठते हैं। और वह समझते हैं कि जो वह कर रहे हैं वह सब ठीक है। बच्चों की जिद्दी होने के सामाजिक मानसिक और भौतिक तीनों कारण होते हैं इसके विषय में नीचे जानकारी दी गई है।

सबसे पहले हम बच्चे की मानसिक समस्याओं की जिद्दी पन का कारण जानने का प्रयास करते हैं।

1.ओपोजीशनल डेफिएंट डिसऑर्डर :

यह एक प्रकार के मानसिक विकार में आता हैं। इस प्रकार के डिसऑर्डर में बच्चों की सोचने समझने उसके विस्तार से व्यवहार करने का तरीका बिल्कुल ही अलग होता हैं। बच्चे छोटी-छोटी बातों पर जीत करने लगते हैं। वह अपने बड़े बुजुर्गों की बात नहीं मानते उन्हें ऐसा लगता है कि वह कर रहे हैं वह सारा काम सही है।

2. चाइल्ड एब्यूज :

कई बार बच्चों को ऐसी बहुत सारी अप्रिय घटनाओं का सामना करना पड़ता हैं। जिसकी वजह से बच्चे मानसिक रूप से काफी परेशान हो जाते हैं। वह अपनी समस्या को अपने माता-पिता को भी नहीं बता पाए।

 जिस कारण वह जिद्दी हो जाते हैं वह चिड़चिड़ा रहने लगते हैं और धीरे-धीरे समाज से कटने लगते हैं। उन्हें समाज के लोगों की बातें बिल्कुल पसंद नहीं आती। 

यदि बच्चे को ऐसी किसी भी अपरिय घटना का सामना करना पड़ रहा है तो उन्हें तुरंत अपने पेरेंट्स से बात करनी चाहिए।

3. डाउन सिंड्रोम :

डाउन सिंड्रोम एक प्रकार का शारीरिक विकार है इस प्रकार के सिंड्रोम में भी बच्चा जिद्दी हो जाता हैं। डाउन सिंड्रोम में बच्चों के क्रोमोजोम डिसऑर्डर में डिसबैलेंस हो जाता हैं। जिसके कारण यह सिंड्रोम बच्चों के अंदर पाया जाता है इसमें बच्चों के व्यवहार में बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलता है।

4. तनाव :

ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं। जो अपने पारिवारिक सख्त या अनुशासन व्यवहार के कारण भी जिद्दी हो जाते हैं। क्योंकि वह तनाव में रहने लगते हैं और चिड़चिड़ा होने लगते हैं।

जिसके कारण में किसी की भी बात मानना पसंद नहीं करते। वह छोटी-छोटी बात पर जिद करने लगते हैं। जैसे कि वह जिद करते हैं कि वह खाना नहीं कहेंगे या स्कूल नहीं जाएंगे और वह अपनी माता-पिता की बात भी नहीं मानते।

5. माता-पिता का व्यवहार :

माता-पिता का व्यवहार भी बच्चे को जिद्दी बना लेता है। यदि माता-पिता का व्यवहार बच्चों के प्रति ठीक नहीं होता मैं बात बात पर अपने बच्चों को डांटे फटकारते रहते हैं। उसकी किसी भी बात को नहीं मानते।

 उसके द्वारा कही जाने वाली हर बात को जानकारी देते हैं तब भी बच्चा जिद्दी हो जाता है। यदि माता-पिता के द्वारा बच्चों की कही गई बात को नजरअंदाज किया जाता हैं। यह उसकी बात को हंसना किया जाता है तब भी बच्चे जिद्दी हो जाते हैं।

6. अधिक अपेक्षा :

यदि माता-पिता के द्वारा बच्चों पर बहुत अधिक दबाव बनाया जाता है तब भी बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। कई काम ऐसे होते हैं। जिस बच्चे बिल्कुल भी करना पसंद नहीं करते परंतु माता-पिता के दबाव के कारण उन्हें वह कार्य करना पड़ता है। 

जिसके कारण बच्चे तनाव में रहने लगते हैं और जिद्दी हो जाते हैं। सबसे ज्यादा बच्चों पर दबाव होता है। उनकी पढ़ाई को लेकर सभी माता-पिता यह चाहते हैं कि उनके बच्चे 90% अंक लाइन परंतु सबके लिए यह पॉसिबल नहीं हो पता।

7. नजरअंदाज करना :

ऐसे बहुत सारे माता-पिता है जो अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते उसका ख्याल नहीं रखते जिसके कारण भी बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। बच्चे का ध्यान ना रख पाने की बहुत सारे कारण है जैसे की माता-पिता कामकाजी हैं।

और उन्हें समय की कमी है जिसके कारण बच्चा उनका ध्यान खींचने का कोशिश करता हैं। और जिद्दी की तरह व्यवहार करता है। धीरे-धीरे यदि लगातार बच्चा इस प्रकार का व्यवहार करता रहता है तो वह जिद्दी हो जाता है।

जिद्दी बच्चों के लक्षण

समाज में बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं (Ziddi Bachon ke lakshan) )जो अपने माता-पिता की सारी बात मानते हैं। उनके कहने पर चलते हैं। और किसी भी चीज को मांगने की ज़िद नहीं करते उन बच्चों को जिद्दी नहीं कहा जाता।

अपितु ऐसे बच्चे जो हर छोटी-छोटी चीज को लेने के लिए जिद कर जाते हैं। और जाते हैं और रोने लगते हैं कि उन्हें वही चीज चाहिए। ऐसे बच्चों को जिद्दी कहा जाता है। जिद्दी बच्चों को लगता है कि वह जो भी कर रहे हैं।

 वह बिल्कुल सही है वह अपनी चीजों को करवाने के लिए बहस करते हैं। और उसकी राजा मंडी मिलने के बाद ही चुप बैठते हैं। जिद्दी बच्चों के कुछ लक्षणों के विषय में नीचे जानकारी दी गई है।

  • जिद्दी बच्चे ऐसे होते हैं जिनके दिमाग में संभव जैसी कोई चीज नहीं होती। वह हर काम को करना चाहते हैं और उसे कर भी सकते हैं।
  • जिद्दी बच्चे ऐसी स्थिति को उत्पन्न करते हैं कि सब परेशान हो जाए और वह बात-बात पर गुस्सा करते हैं।
  • जिद्दी बच्चे ना तो किसी प्रकार के नियम को मानते हैं ना ही कानून को वह अपने आप को जोखिम में डालने से भी नहीं कतराते।
  •  वह किसी भी प्रकार की मूर्खतापूर्ण हरकत करने के लिए बिल्कुल तैयार रहते हैं।
  • हर बाद में अपने आप को सही और सामने वाले को गलत फहराने का प्रयास करते हैं। किसी भी प्रकार की बहस में अपने तर्क को सबसे ऊपर रखने का प्रयास करते हैं।
  • किसी भी व्यक्ति से दुर्व्यवहार करने में नहीं कतराते आलोचनात्मक रवैया रखते हैं। और किसी भी व्यक्ति पर भरोसा करने में विश्वास नहीं रखते।

च्चों की अलग-अलग तरीके की जिद

जिद्दी बच्चे ऐसे होते हैं (Bachon ke tarike ki zid) )कि जब उनकी एक चीज़ पूरी हो जाती है वह दूसरी चीज की मांग करने लगते हैं। जिद्दी बच्चे किस प्रकार की जिधे करके अपनी बात मानवता हैं उसके विषय में नीचे जानकारी दी गई है।

1.मोबाइल की जिद :

आजकल के बच्चे मोबाइल को ज्यादा पसंद करते हैं। अधिकतर समय आजकल के बच्चे मोबाइल पर बिताते हैं। वह मोबाइल पर अपने मनपसंद की चीजों को डाउनलोड करके या इंटरनेट के द्वारा मंगवा कर उन्हें देख सकते हैं।

छोटी सी उम्र में पेरेंट्स भी बच्चे को मोबाइल दिखाना शुरू कर देते हैं। जिसके कारण धीरे-धीरे करके बच्चे को मोबाइल की लत लग जाती हैं। जब उसे मोबाइल पसंद आने लगता है और वह उसमें गेम्स वगैरह खेलने लगता है तब वह मोबाइल की जिद करने शुरू कर देता है।

2.खाना ना खाने की जिद :

छोटे बच्चे अक्सर खाना ना खाने की जिद करते रहते हैं। शुरुआत में जब बच्चे खाना नहीं खाते तब माता-पिता उन्हें अन्य चीज खाकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं।

धीरे-धीरे बच्चों की ऐसी आदत पड़ जाती है कि वह खाने के स्थान पर अन्य चटपटी चीज खाने की जिद करने लगता हैं। और यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक माना जाता हैं। बच्चों के खाने की पूर्ति किसी अन्य पदार्थ से नहीं करनी चाहिए यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

3.पैसे मांगने की जिद :

बच्चों के अंदर पैसों को मांगने की इज्जत बहुत ज्यादा होती हैं। शुरुआत में हम बच्चे को पैसे दे देकर इतना बिगाड़ देते हैं कि बड़े होकर उन्हें पैसों की इतनी ज्यादा डिमांड हो जाती है। कि वह उसकी जिद करने लगते हैं।

 यदि आपका बच्चा किसी भी चीज को खाना चाहता है तो आपको वह चीज उसे लाकर देनी चाहिए ना कि उसे पैसे देने चाहिए। यदि बच्चे को टॉफी चॉकलेट या किसी भी प्रकार की ऐसी चीज खानी हैं।तो आप मार्केट से पहले ही लाकर इन चीजों को घर में रखते हैं शुरुआत से ही बच्चे को पैसे देने की आदत ना डालें।

4.नए खिलौने की जिद :

बहुत सारे ऐसे बच्चे होते हैं जिनके पास बहुत सारे पुराने खिलौने होने के बावजूद भी उन्हें नए खिलौने चाहिए होते हैं। ऐसे बच्चे भी बहुत जिद्दी होते हैं।

 घर पर बहुत सारे खिलौने होने के बाद भी यदि बच्चे मार्केट में जाते हैं तो वह नए खिलौने को मांगना शुरू कर देते हैं। और उसके लिए जिद कर जाते हैं। रोने लगते हैं बच्चों की इस प्रकार की बेकार की जगह को पूरा नहीं करना चाहिए इससे बच्चा और ज्यादा जिद्दी हो जाता है।

5.होमवर्क न करने की जिद :

छोटे बच्चों को अक्सर अपने भविष्य के विषय में जानकारी नहीं होती। जिसके कारण उन्हें पढ़ाई लिखाई अपने होमवर्क में किसी भी प्रकार का कोई इंटरेस्ट नहीं होता। यदि बच्चे पढ़ना लिखना बिल्कुल नहीं चाहते।

 तो वह अपने होमवर्क न करने की जिद करते हैं वह चाहते हैं। कि उनके माता-पिता उनका सारा होमवर्क कंप्लीट करते हैं परंतु माता-पिता को ऐसा नहीं करना चाहिए। बच्चों की सभी चीजों को पूरा नहीं करना चाहिए इससे बच्चों की आदत और ज्यादा खराब होती है।

6.टीवी देखने की जिद :

बच्चों के अंदर टीवी कंप्यूटर या मोबाइल देखने में बहुत ज्यादा रुचि होती हैं। यदि आप दिन भर बच्चों को टीवी देखते हैं बता दे तो वह दिन भर टीवी देख सकता हैं। बच्चा ज्यादातर टीवी में कार्टून देखना पसंद करते हैं।

 कार्टून बच्चों के मन पसंदीदा कार्यक्रम होते हैं। बच्चों में बच्चों की कहानियां कविताएं आदि चीजों को देखकर इंटरेस्ट लेते हैं। और यदि आपने टीवी देखने से रोकते हैं। तो वह और ज्यादा टीवी देखने की ज़िद करते हैं।

बच्चों की ज़िद को संभालने और उन्हें सुधारने के कुछ टिप्स

बच्चों को संभाले और सुधारने और उनकी जिद को कम करने के कुछ टिप्स नीचे दिए गए हैं।

बच्चों को सुने और बहस से बच्चे :

यदि आपका बच्चा आपसे कुछ कहना चाह रहा हैं। या आपसे बात करना चाह रहा हैं। तो आपको अपने बच्चों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना चाहिए।

 बच्चों की बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और ना ही उसकी बात को हल्के में लेना चाहिए। बच्ची की बात को ध्यान से सुनना चाहिए और यह कोशिश करना चाहिए। कि आपको यदि आपने बात मनमानी है तो उसे बहस नहीं करना है।

बच्चों पर दवाब डालने की जगह उनसे जुड़ने का प्रयास करें :

माता-पिता को इस बात का प्रयास करना चाहिए कि वह अपने बच्चों पर जोर दबाव न डालकर उनसे प्यार से काम करवाने का प्रयास करें। यदि वह बच्चे से डांट फटकार या जोर जबरदस्ती करके किसी प्रकार के कार्य करवाने की प्रयत्न करते हैं। तो इससे बच्चों के मन में ही मारना जागृत हो सकती है हमें कोशिश करना चाहिए। कि वह बच्चे से प्रेम से कार्य करवा सके।

शांत रहे :

यदि आपका बच्चा आपसे बार-बार बात नहीं कर रहा है या आपकी बात नहीं सुन रहा हैं। तो आपको उसे तेजी से नहीं चलना चाहिए। या उसके साथ किसी भी प्रकार का वायलेंट बिहेवियर नहीं करना चाहिए। बच्चों से बिल्कुल आराम से बात करने का प्रयास करना चाहिए और हमेशा शांत रहना चाहिए। ज्यादा हाइपर नहीं होना चाहिए।

टॉपिक संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर (FAQ) 

Q. बच्चों के अंदर जिद्दी क्या परिभाषा है? 

जो बच्चे जिद्दी होते हैं वह अपनी बात को सर्वोपरि मानते हैं।

Q. जिद्दी बच्चों के साथ क्या-क्या परेशानी दिए सामना करना पड़ता है?

यदि आपका बच्चा जिद्दी है तो वह मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता हैं। या किसी की भी बात नहीं सुनता अपने तर्क को सबसे ऊपर मानता है।

Q. बच्चे अक्सर किन बातों पर जिद कर बैठते हैं?

बच्चे अक्सर मोबाइल देखने पर टीवी देखने पर गेम खेलने पर आदि चीजों पर जिद करने लगते हैं।

Q. यदि आपका बच्चा जिद कर रहा है तो आपको कैसा व्यवहार अपनाना चाहिए? 

जिद्दी बच्चों के साथ बात करने का प्रयास करना चाहिए और हमेशा शांत रहना चाहिए।

निष्कर्ष :

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको जिद्दी बच्चों को कैसे समझाएं? (Ziddi Bachon ko kaise samjhaye) के विषय में जानकारी देने का पूरा प्रयास किया है।यदि फिर भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो आप कमेंट करके कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

हमारे आर्टिकल के द्वारा प्रदान की हुई जानकारी बिल्कुल ठोस और सटीक है ।अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आए तो आप इसे अवश्य शेयर करें । हमारा आर्टिकल पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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